रेडियोडायग्नोसिस केन्द्र

शहर के सबसे पुराने एक्स-रे मशीनों में से एक इस संस्थान में स्थापित किया गया था। यहाँ परिष्कृत सेरेब्रल एंजियोग्राफी, न्यूमोएंसेफलोग्राफी, एयर वेन्ट्रीकुलोग्राफी, माइलोग्राफी इत्यादि परीक्षण की सुविधा के साथ एक अति आधुनिक रेडियोलोजी विभाग की स्थापना सन् 1954 में हुई थी। केन्द्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान का न्यूरोइमेजिंग एवं रेडियोलॉजिकल साइंसेज का यह केन्द्र न्यूरोसाइकायट्री (तंत्रिका मनोचिकित्सा) के ओपीडी मरीजों एवं भर्ती मरीजों के लिए इमेजिंग (छवि चित्रण) से संबंधित विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करता है। इस आधुनिक विभाग में कम्प्यूटेड रेडियोग्राफी, पूरे शरीर का अल्ट्रासाउंड एवं डॉप्लर, क्रेनियल डॉप्लर, 16 स्लाइस स्पाइरल कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) आदि की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा, इस विभाग में 3.0 टेसला का फंक्सनल मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एफएमआरआई) मशीन को संस्थापित किया जा चुका है। एफएमआरआई मशीन के आ जाने के कारण अब तंत्रिका विज्ञान एवं मनोचिकित्सीय विकारों के लिए मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेट्रोस्कॉपी (एमआरएस) एवं फंक्सनल मैग्नेटिक रेजोनेन्स इमेजिंग (एमएमआरआई) के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य काफी सुविधाजनक हो गया है। यह विभाग संस्थान के लिए एक विशेष धरोहर है। मनोचिकित्सा के स्नातकोत्तर छात्र/छात्राएँ अपने शैक्षिक एवं शोध कार्यों के उद्देश्य से नियमित रूप से इस विभाग के सम्पर्क में रहते हैं।

वर्ष 2017 में किये गए कुल जाँचों की संख्या-4769 थी।

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